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जीवन के कटु सत्य वचन

 

जीवन के कटु सत्य वचन


ईश्वर सबको देत है, देत्त राहत दिन रात।

केवल फर्क इतना है, कि देत पराये हाथ ।




दीनबंधु वाहि दिना, देह देत लिख देत।

मूरख अपने विज्ञान से, बिरथा सोच कर लेत।




अपने अपने घरन की, सब काऊ को पीर।

तुम्हें पीर सबघरन की, धंन धंन रघुवीर।


तन छोडा,  माया छोडी। 

छोड़े संबंधी यार,

 केवल साथ ले गए पाप पुण्य का भार।



यह सत्य है कि, भगवान के ध्यान से जग जीता जा सकता है लेकिन यह भी परम सत्य है कि, यह जग सदैव तुम्हारा नहीं हो सकता।

यह जग परमात्मा का था, परमात्मा का है, और परमात्मा का सदैव रहेगा।


राम न मारे काऊ खो,  राम न पापी होय।

 आपही खुद मर जाओगे, कर कर खोटे काम। सियावर रामचंद्र की जय।










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